ऐसी महंगाई में मेहमान चले आते हैं
जगमग जगमग चमके म्हारी, बाबुल की अटरिया
अरे सेल लगी है, ढाई आना
क्या निराला ठाठ है विषधारी का
म्हारे घर को मालिक तू है,कोई फिकर नहीं म्हाने,
ना तो खाटू की गलियां सोती है,
अरे क्या गाड़ी हो गई लेट मेरे बालाजी ना आए
हनुमान जी तुम्हारी शरण में आया
जब-जब दुख से घबरा के मैंने तेरा नाम लिया
मदन मोहन तेरे ऊपर, मुकदमा हम चलायेंगे
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