त्रिपुरारी त्रिपुरारी जय जय विश्वनाथ त्रिपुरारी।
मोहन बस गयो री बस गयो मेरे मन में,
महिमा का तेरी,कैसे करूं में बखान।
अभी तो उम्र मेरी बारी, बलम ले आए हैं साड़ी।
आ जाना ऊंची अटारी मेरे बांके बिहारी,
सांवरे कलयुग में,
मत लेना अवतार,
छोटा-छोटा पगलीआ ने मंदिर है विशाल
अटरिया में काग बोले बागों में बोले मोर
फिर कब हरि से हेत लगावैगौ,
तेरी बीती जाय उमरिया
चरण महा सुखदाई,किशोरी जु के चरण महा सुखदाई।
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