चढ़ बैठ्यो उड़न खटोलै मं
चढ़ चालो गुरांजी के देश
बठ ही तेरो साहेबो बसे
चले गए दिल के दामनगीर।।
चंचल मन निशदिन भटकत है
गणेश हमेश मनावा जी,,
कह संत संग्राम
हाथ म हिरा आया
शंकर चौरा रे,
महामाई कर रही सोल्हा रे
श्रृंगार,
जाण कै जमारै नै, बिगाड़े मत ना,
मैया जी मैं तो वृन्दावन चली जाऊंगी, पर भजन श्याम के गाऊँगी
रिद्धि सिद्धि वाले गणपति बाबा तेरी महिमा भारी है
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