कईयां बैठया हो बाबा चुपचाप रे सुनल्यो सुनल्यो थे म्हारी फरियाद रे
मिलने तुझ्से आए सुन ले बाबा खाटू वाले।
माई नौ दिन की मेहमान गौरा बाई आई पावनी
गंगा किनारे चले जाणा
मुड़के फिर नहीं आणा
बादिला लेता आइजो जी घुमेरदार लंजो
बैसाख महीना आई गनगोरा, देवा रे देवा झालर आओ
गुरु के देश चली जाऊंगी लौट के फिर ना आऊंगी
गौरी पूजू जानकी जनक भवन में।
तेरी कमली हो गई या, तेनु तरस जरा ना आया।
थारे सिर पर घूम रहयो काल, गाफल में मनडा कांई रे सूतो।
You must be logged in to post a comment.