श्याम प्रेम की भक्ति में क्या खूब सजा दरबार
कृष्णा तेरी ये प्रीत में मोहन तेरी ये प्रीत में जोगन सी बन गई हूँ मैं
गंगा बहे मेरे अंगना में सत्संग गंगा बहे,
हर ओम ओम शंकर जी, मेरे रोम रोम में शंकर जी।
न्यारो हो जा रे भरतार तेरी माई लड़े दिन-रात न्यारो हो जा रे
कुरमुर कुरमुर पगल्या बाजे,
कौन जिनावर जाय,
मैं तो ठाडी भुजा पसार किशोरी कब आओगी।
मनवा भोले शिव शंभू, मैं तेरा हो गया मेरा तू।
बहुत सुख मिलता है भोले तेरी शरण में
ते जीमण को चटो स बाबा जीमण बठे ही जाव
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