झोली सब की सब की भर्ती है मां अंजनी के दरबार में।
नारी ने नर को जनम दीया क्या खेल रचाया नारी ने।
नाथ को रूप भयंकर, सदाशिव भोले शंकर।
म्हारा श्याम धनी है लीले को असवार,ये लीले चढ़ आवे है।
मैं हार गया जग से अब तुमको पुकारा है
हमारे लाडले ठाकुर करे सिंगार प्यारी का।
सावन मास बहार देखु सखि
घणा दिन सो लिया रे अब तो जाग मुसाफिर जाग
माखन मिश्री में क्या बल है जिसमें कान्हा मगन है।
झूला तो पड़ गए यमुना के तीर में जी।
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