खम्मा घणी म्हारा पीरा खम्मा घणी।
आज की रात रूक जाना गजानन हमरी नगरिया में।
गाओ रे गणेश मनाओ हनुमाना,
ओ बाबा राम रूनीचे वाला, भगत पर मेहर कर दे
अब थे क्यों या भूलया, घर-घर घर का चूल्हा
रिंगस की नगरी में, खाटू का डंका बजता है
श्याम तेरी हो गई मैं जोगणिया
बाबा राम रुणिचे वाला,
गळ विच मोतियन की माळा,
एक रूपये में सीता ले लो एक रूपये में राम
देवा हो देवा श्री गणेशा, देवा हो देवा श्री गणेशा।
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