रिद्धि सिद्धि ने परनवा जावेला ओ राज
जाग ये जगदंबा सारों जग जाग्यो।
तेरे रहते कैसे बाबा हार रहा हूं में
सुमिरन कर मस्त जवानी में पच्छे बुढ़ापो कुन देखयो।
नथली रो सिंगार ढोला, नथलि मनवार।
चल गया चल गया चल गया रे साँवरे का जादू चल गया रे,
जमाना है बेईमानी का,नेकी का नहीं ठिकाना है।
मन लोभी जिवडा,हो गयो मोड़ो रे दिन रहियो थोड़ो रे।
जीते जी तो कदर न जानी अब क्यों श्राद्ध मनावे।
ओ बाबा मेरा हाथ पकड़ ले मैं घणी दूर से आया।
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