मची हैं धूम शादी की शहर में किसकी शादी है
मुझे चूड़ियां पहनादो मुझे घुंगरू पहनादो
भेजा निमंत्रण आज, बन्ना तेरी शादी में।
नैयां मेरी कागज की कैसे उतारे पर भला
की ब्रज में बसालो मुझे, की अपना बना लो मुझे।
कभी भूलू ना याद तुम्हारी प्रभु,
तेरा नाम मैं साँझ सवेरे,
श्री सरस्वती चालीसा
हनुमत तेरे नाम का डंका बजता चहूं और है।
मुझे तब श्याम तेरी याद बहुत आती है।
आज शुभ दिन आया रे बरसों के इंतज़ार में
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