म्हारी चंद्र गौरजा, रतनारो खंभो दिख दूर स्यूं
शंकराय शंकराय, मेरे भोले शंकराय।
मची है धूम सारे जगत में दूल्हा बने हैं महाकाल राजा,
मेले में जाऊं तो म्हाने,मिले पुराना रसिया सा।
झुक जाई रे हरिया पोदिना
पि के शंकर जी की बूटी, अँखिया खुल गयी निंदिया टूटी
छप्पर फाड़ कर देता भैया मेरा भोला दानी।
राम दर्शन को, बनारसी बाबा आए हैं
सांवली सूरत पे भाभी, दिल दीवाना हो गया।
कानूड़ा लाल घडलो म्हारो भर दे रे।
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