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शिव भजन लिरिक्सshiv bhajan lyrics

Pi ke Shankar ji ki buti ankhiya khul gayi,पि के शंकर जी की बूटी अँखिया खुल गयी निंदिया टूटी,shiv bhajan

पि के शंकर जी की बूटी, अँखिया खुल गयी निंदिया टूटी

पि के शंकर जी की बूटी, अँखिया खुल गयी निंदिया टूटी ।पि के शंकर जी की बूटी, अँखिया खुल गयी निंदिया टूटी। नया से लागे सब संसार, जरा सी होये, जरा सी हाय ,जरा सी और पीला दो भोलेनाथ।, जरा सी और पीला दो भोलेनाथ।। पि के शंकर जी की बूटी, अँखिया खुल गयी निंदिया टूटी।



नया से लागे सब संसार,हाय जरा सी और पिला दे यार, जरा सी और पीला दो भोलेनाथ।। पि के शंकर जी की बूटी, अँखिया खुल गयी निंदिया टूटी पिके शंकर जी की बूटी, अँखिया खुल गयी निंदिया टूटी।



ये बूटी द्रोपदी ने पी ली।ये बूटी द्रोपदी ने पी ली।
उसका चीर बढ़ाए भगवान, जरा सी ,
जरा सी, और पीला दो भोलेनाथ।जरा सी, और पीला दो भोलेनाथ।जरा सी, और पीला दो भोलेनाथ।जरा सी, और पीला दो भोलेनाथ।



ये बूटी प्रहलाद ने पी लीये बूटी प्रहलाद ने पी ली।उसको खम्बे में मिले भगवान, जरा सी ,
जरा सी, और पीला दो भोलेनाथ।जरा सी, और पीला दो भोलेनाथ।



ये बूटी जब मीरा ने पी ली।ये बूटी जब मीरा ने पी ली।उसको प्याले में मिले भगवान, जरा सी ,
जरा सी ,और पीला दो भोलेनाथ।जरा सी, और पीला दो भोलेनाथ।



ये बूटी सब भक्तो ने पी ली।ये बूटी सब भक्तो ने पी ली।सबका हो गया बेडा पार ।जरा सी ,
जरा सी, और पीला दो भोलेनाथ।जरा सी, और पीला दो भोलेनाथ।जरा सी, और पीला दो भोलेनाथ।जरा सी, और पीला दो भोलेनाथ।

पि के शंकर जी की बूटी, अँखिया खुल गयी निंदिया टूटी ।पि के शंकर जी की बूटी, अँखिया खुल गयी निंदिया टूटी। नया से लागे सब संसार, जरा सी होये, जरा सी हाय ,जरा सी और पीला दो भोलेनाथ।, जरा सी और पीला दो भोलेनाथ।। पि के शंकर जी की बूटी, अँखिया खुल गयी निंदिया टूटी।

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