तेरी बड़ी-बड़ी बात सुनी बालाजी, हे अंजनी के लाला जी।
हरी धरे मुकुट खेले होरी , शिर धरे मुकुट खेले होरी।
कौन है वो कौन है वो,
कहाँ से वो आया
हो रयो बाबा की नगरी में,
केसर चंदन को छिड़काव।
लागी लगन मत तोडना,
प्रभु जी मेरी लागी लगन मत तोडना,
फागुन में होली खेलुगी मैंने कर ली है फुल तयारी।
लुटा दिया भण्डार खाटू वाले ने
होली बरसाने की खेलूं, ब्रज में ले चल रसिया मोहे
हे गोपाल राधा कृष्ण गोविंद गोविंद कृष्ण,
कलयुग में तेरा नाम अमर है तू अवतार निराला।
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