बाबा प्रेम की होली है, श्याम संग खेलू होली उन्हें रंग जो लगाना है।
ऐसे सज धज कर बैठा,
मेरा साँवरा,
सांवरा बागो बणायो,
थारो चाव सै,
चालो जी चालो भक्तों, ग्यारस की रात है आई, खाटू में बैठा है कन्हाई,
श्याम नाम की मेहंदी रचाकर,
घूँघट में शर्माउंगी,
Mere pyare kanha tu mera chitchor,
लेके हाथों में निशान,
दर पे आया पहली बार
खाटू वाले से अपनी,
मुलाक़ात हो गई,
होरी के रसिया से ये कहदो हम बरसाने वाले है,
रंगीला मौसम छाई बहार,
था सब को जिस पल का इंतज़ार,
तुहियो काला काला मेरे कृष्णा,
लगे प्यारा ओ प्यारा मेरे कृष्णा….
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