चोरी चोरी मिलया कर काम दुनिया दे नहीं मुकदे,
मुझे ऐसी लगन तू लगा दे, मैं तेरे बिना पल ना रहूँ,
ओ रे वनवारी तेरी बतियाँ न मानु
आजा लग जा गले नंदलाल के होली आयी है,
काला काला है वो मुरली वाला है वो,
ये तो बात निराली हो गई
कन्हियाँ प्यारे से नन्द के दुलारे से खेलेगे होली हम तो आज,
कृष्ण गोवर्धन धारि हरे,
जय मुरमर्दन मुरारि हरे,
मनमोहन तुझे रिझाऊं, तुझे नित नए लाड लडाऊं,
छोड़ बैठा है सारा जमाना मुझे,
नाथ अब आप हीं दो ठिकाना मुझे।
मारा सांवरिया गिरधारी माह है महीना की रुत प्यारी,
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