घर में हमारे कान्हां एक बार आ जाओ,
जब से साथी बना मेरा तू दिलदार साँवरिया
नन्द गांव रावल बरसाना धूम मची है भारी,
Na narsi si bhakti na sudama sa nata
ले कर के उंमीदे मन में जो भी खाटू धाम गया,
राधा की रटन लगा वो बंसी वाला मिल जाएगा,
गम की कोई बदली अगर छा जाये,
श्याम आ जाते है,
उज्जैन के राजा कभी किरपा नजरिया,
दुखिया पे डालना रे,
तूने अंखियों से पिलाई,
मस्ती हमको यूं चढ़ाई,
सपने में सखी देख्यो नन्दगोपाल।
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