रंग डारो ना सवारियां मेरो बिगड़ो सब सिंगार,हो रंग डारो ना
फागण की रुत ये लाइ बहार,
मन में उमंगें छाई अपार,
जो भी दरबार में आया,
वो अब तुम्हारा है,
गुणगान करो श्री श्याम का, सब ध्यान धरो श्री श्याम का।
जो भी आया लुट गया, मोहन तेरे दरबार में,
फागण की रुत आई भक्तों में खुशहाली है,
सजा है प्यारा दरबार बाबा का,
लगे है न्यारा दरबार बाबा का,
प्रेम तुमसे किया तो गलत क्या किया,
ज़िंदगी ये अब तो तेरे नाम है सँवारे,
कब आओगे,
लाज मेरी लूट जाएगी,
क्या तब आओगे,
भूल गए बनवारी,
लौट कब आओगे,
You must be logged in to post a comment.