अयोध्या नगरी, आज सोने री भई, आज सोने री भई, राजा री नगरी, आज सोने री भई ।।
भगति दोरी रे, भगति वाली बातां करबो सोरी रे. भक्ति दोरी रे
सातों बहना ने सोवे रे, गुलाब गज़रो।
आंख्या देखो भाईड़ा, कानों री खिड़कियां खोलो रे, सत्संग में चालो रे, मिलसी राम जी ।।
डूब रही नाव तेरी मैं हूं खेवईया। लोग मुझे प्यार से कहते हैं कन्हैया।
दोय दिना री बन्दा सायबी, कांई तेग दिखावे।
श्याम का ध्यान लगा ले बन्दे,
दो दिन की जिंदगानी है,
राम ने भजलो रे भाई, राम ने भजलो रे भाई। भाई लेवा ने हरी नाम, तिरवा ने हैं गंगा माई ।
सुनी उड़े बात नई कीर्तन में,
मंदोदरी रावण को रही समझाएं, सिया ना साधारण नारी।
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