राम जी के साथ जो हनुमान नहीं होते,
राम जी के पुरे कभी, काम नहीं होते,
Author: Pushpanjali
करते हैं कीर्तन बाबा,
रोज तेरे नाम का,
गुरु में संसार समाया,
उनका है आशीष पाया,
सुण सुण हो,
म्हारी काया ओ लाड़ली,
आत्मा में दाग़ लगाजे मति,
जीव तू मत करना फिकरी ,
धम धम सीता महले चढे,
मायलो जाने रे अमर मारी काया जी,
प्रथम निमंत्रण आपको,
गजानंद सरकार,
मनवा नहीं विचारी रे ।
थारी म्हारी करतां ऊमर ,
बीती सारी रे ।।
घुमतड़ा घर आवो,
ओ म्हारा प्यारा गजानन,
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