गणपति आयो बापा,
रिद्धि सिद्धि लायो,
Author: Pushpanjali
रणत भंवर से आओ,
हे रिद्धि सिद्धि रा भरतार,
भोले शंकर तेरे दर्शन को लाखो कवाडयिा आये रे,
आशा ले आया थारे ठेट, ओ मारी आशा कवरी,
जिसने भी लगाया जयकारा, दुनिया से फिर ना वो हारा,
मोरी टेर सुनो ब्रज के वासी, ओ गोवर्धन गिरधारी।।
मैं जब जब दुनिया से हारा, मेरा बन गया श्याम सहारा,
तेरी आँखों के तारे करोड़ों माँ,
जब तक सांसे रहेगी, खाटू आऊंगा श्याम,
मिल गया जबसे,तेरा ये दर सांवरे, फिर हुआ ना कभी,दर ब दर सांवरे,
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