वीर बली हनुमान, थारे ह्रदय सियाराम,
Author: Pushpanjali
आया ऐसा बुढ़ापा ओ मेरे सांवरिया।
ढोलक बाज रही मंदिर में, हमारो मन शंकर से लाग्यो।
मेरे गौरी लाला आजा, तेरे भक्त खड़े हैं गली गली
सालासर बालाजी भगता की अरज सुनो।
बंदरवा लाल लंका में डोले,
मोहे भा गया बंशीवाला,
बन गयी जोगनिया,
जो खींच गगरिया सर से तूने लई कन्हैया, तेरे घर बोल दूंगी
राधा रानी फोन पर फोन मिलाबे,
मोटा मोटा बालाजी को मोटा दरबार है।
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