चढ़ बैठ्यो उड़न खटोलै मं
Author: Pushpanjali
चढ़ चालो गुरांजी के देश
बठ ही तेरो साहेबो बसे
चले गए दिल के दामनगीर।।
चंचल मन निशदिन भटकत है
गणेश हमेश मनावा जी,,
कह संत संग्राम
हाथ म हिरा आया
शंकर चौरा रे,
महामाई कर रही सोल्हा रे
श्रृंगार,
जाण कै जमारै नै, बिगाड़े मत ना,
मैया जी मैं तो वृन्दावन चली जाऊंगी, पर भजन श्याम के गाऊँगी
रिद्धि सिद्धि वाले गणपति बाबा तेरी महिमा भारी है
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