तुम तो छलिया लूट कर चल दिए, मैं तो लुट गई भोलेपन में।तुम ने आग लगा दी मन में।
वृंदावन में मस्त हवाएं,चांदनी रात में आज लताएं।वृंदावन में मस्त हवाएं,चांदनी रात में आज लताएं।बीते दिनों की याद दिलाए, उमड़ी घटा गगन में। तुम ने आग लगा दी मन में।तुम तो छलिया लूट कर चल दिए, मैं तो लुट गई भोलेपन में।तुम ने आग लगा दी मन में।
इस शरीर का त्याग करूंगी।
मर के अमर सुहाग करूंगी। तुम ही बताओ तुम बिन मोहन,क्या है इस जीवन में
तुम ने आग लगा दी मन में।तुम तो छलिया लूट कर चल दिए, मैं तो लुट गई भोलेपन में।तुम ने आग लगा दी मन में।
आंखों में है सपने तुम्हारे, मीठे-मीठे प्यारे-प्यारे।
सारा जीवन तुम बिन बीता, मर गई में बचपन में ।तुम ने आग लगा दी मन में।तुम तो छलिया लूट कर चल दिए, मैं तो लुट गई भोलेपन में।तुम ने आग लगा दी मन में।