टूटी छान टपक रहा पाणी आजा मेरे श्याम गरीबी में। जो सुख मिल जाए भजन करण में वह सुख नाही अमीरी में।
ताते पानी की भरी रे बाल्टी नहा ले मेरे श्याम गरीबी में।जो सुख मिल जाए भजन करण में वह सुख नाही अमीरी में।टूटी छान टपक रहा पाणी आजा मेरे श्याम गरीबी में
पीत पितांबर टसरे की धोती पहनो मेरे श्याम गरीबी मे।जो सुख मिल जाए भजन करण में वह सुख नाही अमीरी में।टूटी छान टपक रहा पाणी आजा मेरे श्याम गरीबी में
केसर चंदन भरी कटोरी लगाओ मेरे श्याम गरीबी में। जो सुख मिल जाए भजन करण में वह सुख नाही अमीरी में।टूटी छान टपक रहा पाणी आजा मेरे श्याम गरीबी में
सीत राबड़ी का भरा रे कटोरा, पी ओ मेरे श्याम गरीबी में। जो सुख मिल जाए भजन करण में वह सुख नाही अमीरी में।टूटी छान टपक रहा पाणी आजा मेरे श्याम गरीबी में
देसी घी की ज्योत जगाई दर्शन देव गरीबी में। जो सुख मिल जाए भजन करण में वह सुख नाही अमीरी में।टूटी छान टपक रहा पाणी आजा मेरे श्याम गरीबी में
सब भक्तन की अरज सुनी है मेरी भी सुनो गरीबी में। जो सुख मिल जाए भजन करण में वह सुख नाही अमीरी में।टूटी छान टपक रहा पाणी आजा मेरे श्याम गरीबी में
सब मतलब के साथी हो गए भजे तेरा साथ गरीबी में।जो सुख मिल जाए भजन करण में वह सुख नाही अमीरी में।टूटी छान टपक रहा पाणी आजा मेरे श्याम गरीबी में