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विविध भजन

Fas gayo makdi ka jala me,फस गयो माकड़ी का झाला में

फस गयो माकड़ी का झाला में।

तर्ज, घडलो थाम ले

थारो मनड़ो नहीं लागो ,
दादा माला में।
फस गयो माकड़ी का झाला में।



खोटो खावे ने खोटो पेरे ,
बीरा लागो लोभ का छाळा में।
फस गयो माकड़ी का झाला में। थारो मनड़ो नहीं लागो ,
दादा माला में।
फस गयो माकड़ी का झाला में।



भाई भतीजा कमरा में रोवे ,
बीरा नुत जिमावे सगा साला ने।
फस गयो माकड़ी का झाला में। थारो मनड़ो नहीं लागो ,
दादा माला में।
फस गयो माकड़ी का झाला में।



घर की तिरिया खारी लागे ,
बीरा लागो पर नारी का छाळा में।
फस गयो माकड़ी का झाला में। थारो मनड़ो नहीं लागो ,
दादा माला में।
फस गयो माकड़ी का झाला में।



कहेत कबीर सुणो भाई साधु ,
हरी भजन ने कंठ लगावा।
बीरा फेरो हरी की माला ने।
फस गयो माकड़ी का झाला में। थारो मनड़ो नहीं लागो ,
दादा माला में।
फस गयो माकड़ी का झाला में।

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