पितर जी की महिमा का आओ करे बखान,
श्याम सलोने का सच्चा दरबार है,सच्चे मन से ध्यावो बेडा पार है,
दो पंख दिए होते तो उड़ आता खाटूधाम
काले बिना बात के लात, बता तने कैसे मारी
मेरे गांव में लेके, जन्म फेर आइये तू। बाबा घाटे आले अपना, रूप दिखाईये तू
थाली ऊपर बेला बाजन दे मेरी ननदी।
शिव कैलाशों के वासी, धौलीधारों के राजा
शंकर संकट हारना…
तेरी काया नगर का कौन धणी मारग में लुटे पांच जणी
हसँदा मुस्करादां जा तू नाम ध्यांदा जा
तेरे हाथ मेरी डोर मैं पतंग मेरी मां।
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