एक फकीरा माँ के दर पे बोल रहा जयकारा,
माँ का सज्या है दरबार लाखो लाख बधाईयाँ ने,
छांव तेरी चुनरी की है मेरे परिवार पे।
जन्मो जनम यूँ ही, तेरा प्यार मिले सरकार,
मैं राधे राधे गाके, रहती हूँ मैं मस्ती में, सब छोड़ के आई हूँ, राधे तेरी बस्ती में ।।
शेरावाली को मनाने, हम भी आए है,
फागण का महीना है, खाटू मन्ने जाना है,
वृंदावन हो या मधुवन हो,अंतर्मन को खोलिए। राधे राधे बोलिए राधे राधे बोलिए।
जगदम्बा हमरे घर में, पधार रही रे।।
जन्मो जनम मिले,
मुझे बाबोसा तेरा प्यार,
छुटे ना हमसे कभी,
तेरा ये साँचा दरबार,
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