हसकर पार्वती शिव जी ने वचन सुनावती जी।
मुझे द्वारका दिखा दो नंदलाला, नंदलाला भये गोपाला।
शेर पे होके सवार मैया रानी आ जाइये,
मेरी पहचान मेरी माँ,
बिगड़ी बनाती दुखड़े मिटाती,
करती ठंडी छाँव,
तेरा विछौड़ा झळल्या न जावे,
बिन मिल्या सानूं चैन न आवे,
सब झूमो नाच आज,
नवरात्री का दिन आया है,
मुझे तूने दाता बहुत कुछ दिया है,
तेरा शुक्रिया है, तेरा शुक्रिया ।
मैया तेरे प्यार में तेरे इंतज़ार में,
ऐसा मेरा हाल कर दिया,
नगर खेड़े दी खैर वे साइयां नगर खेड़े दी खैर,
मैया से लगन लगी जबसे,
लगी जब से,
मोहे दीवानी समझन लागी,
जा दुनिया तब से,
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