खुशियों से झोली भरी
ज़िंदगी ये संवर सी गई
सपने मे मेरे सांवरा आता कभी कभी
टीका तो री माता धरया री भवन मैं,
बिंदी उलझ गयी बाला मैं हे री अम्बे जगदम्बे माता,
पीले शेर उत्ते कर के सवारी देखो माता रानी आयी ऐ,
फूलों से सजा है दरबार के मईया जी को प्यारा लगे,
जग में निराली मेरी माँ ओ शेरोवाली दर्श दिखा,
तेरी मोर छड़ी का है बाबा मेरे भी झाड़ा लगा दो ना
कैसी बैठी विकट पहाडन में
जय जगदम्बे मैया
अंगना में बाग लगा दूंगी, तुम अईयो कालका मैया,
ओढ़ चुनरिया लाल मै नाचूं तेरे अंगना में,
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