वृंदावन के कृष्ण कन्हैया,बरसाने की घोड़ी,रंग बरसेगो।
छाने छाने आयो कान्हो धीरे धीरे आयो
गोरा गाला ने कर दियो लाल
इक सूरत तेरी तक के,
कुज ना होर नैणा नूं जचदा ऐ,
एक चोला सी दे रे दर्जी, नवरात्रे आए मैया के।
सांवरिया मेंहदी रंग भरी।।
मेहंदी के हरे हरे पात,मेहंदी रंग भरी।
सांवरे इतना बता तू छुपा है कहाँ
कान्हा ने मोरी मटकी है फोड़ी
मटकी है फूटी रज धारा बही
आ रा सा रा पी गयो दही।
मेरे खाटू के श्री श्याम तेरे नाम की चर्चा दुनिया में,
बाबा खेउँ गूगलियो धूप,
कँवर सा अजमल रा,
You must be logged in to post a comment.