मथुरा घूमी गोकुल घूमी, मैं घूमी ब्रज धाम रे,
पवनसुत अब तक नहीं आए,
श्री सतगुरु जी भगती के खजाने बेठे खोल के,
हाथो में लेके सोटा बंधे है लाल लंगोटा,
मोहे कान्हा की याद सतावे झराझर रोए रही मेरी अखियां
जो लाल लंगोटे वाला है
वो मां अंजनी का लाला है।।
अपने चरणों की भक्ति भगवान् मुझे दे दो
तेरा दर मिल गया मुझको सहारा हो तो ऐसा हो,
वे मैं सदके ललारीया जावा, चुनी नु रंग देन वालिया,जींद तेरे चरना विच लावा, चुनी नु रंग देन वालिया….. जिन्हा राहा मेरा आया ललारी,उन्हा राहा तो मैं सदके वारी,वे मैं रस्ते च पलका बिछावा, चुनी नु रंग देन वालिया,वे मैं सदके ललारीया जावा…. एह ललारी मेरा सब तो निराला,ज्ञान दा रंग चढ़ावन वाला,वे मैं तन […]
दरबार मे बुलाले मेरे श्याम खाटु वाले,
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