जोगी का भेष बनाया घनश्याम बृज में आया…
कोयल कुक कुक के हारी दर्शन दे जा सांवरिया,
जगत रखवाला आया मुरली वाला,
यशोदा जायो ललना मैं वेदन में सुन आई,
आईयो मदन गोपाल मेरे घर तुम आईयो,
मेरा अब क्या होगा भोलेनाथ बीच बुढ़ापे में,
बीच बुढ़ापे में, बीच बुढ़ापे में,
मेरा अब क्या होगा भोलेनाथ…..
हम तेरे आशिक है प्यारे ये दिल दीवाना तेरा है,
घबरा के दिल में मना कर दीनदयाल चल दिया,
रख के छाज में देखो अपना लाल चल दिया,
आवत देखो तो अचक चढ़ी चली आई जमुना
दर पे तेरे भगवन,
मन करता है आने को,
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