राम जी के साथ जो हनुमान नहीं होते,
राम जी के पुरे कभी, काम नहीं होते,
करते हैं कीर्तन बाबा,
रोज तेरे नाम का,
गुरु में संसार समाया,
उनका है आशीष पाया,
सुण सुण हो,
म्हारी काया ओ लाड़ली,
आत्मा में दाग़ लगाजे मति,
जीव तू मत करना फिकरी ,
धम धम सीता महले चढे,
मायलो जाने रे अमर मारी काया जी,
प्रथम निमंत्रण आपको,
गजानंद सरकार,
मनवा नहीं विचारी रे ।
थारी म्हारी करतां ऊमर ,
बीती सारी रे ।।
घुमतड़ा घर आवो,
ओ म्हारा प्यारा गजानन,
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