घर घर में बस रहा है,
मेरा श्याम खाटू वाला,
मेरे सपनों में शंकर जी आने लगे,
वो तो रह रह के जलवे दिखाने लगे।
ऐसी समाधि लगाई रे भोला अखियां ना खोले,
बात सदियों से मशहूर है ज़माने में,
भोले ले चल अपने साथ अकेली घर घबराऊँगी,
मस्त अघोरी मस्त मस्त,
दम अघोरी मस्त मस्त मलंग,
पड़ गए झूले सावन रुत आई रे
पड़ गए झूले
नचो नचो नचो रूत नचने दी आई है,
श्याम दे जन्म दी सब नु बधाई है।
खाटू का सरदार है,
बड़ा असरदार है,
पहनो पहनो जी भोले नाम के गहने,
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