जिस देश में जिस भेष में, परदेस में रहो, राधा रमण राधा रमण, श्री राधा रमण कहो।
ना पैसा लगता है, ना धेला लगता है,
श्री राधे-राधे बोलिए, हमें अच्छा लगता है।
जिस सुख की चाहत में तू,
दर दर को भटकता है,
सारे देवों में कृष्णा गजब ढा गया,
मुझे मुरली वाला पसंद आ गया।
भंगिया का मांगे घूंट भोला रूठो रूठो डोले।
झूला झुलत बिहारी वृंदावन में,
जन्मे ब्रज में नंदलाला,
सब बधाई गाओ री,
आज जन्मे कन्हैया नंद जी के अंगना,
नित नयो लागे साँवरो,
एकी लेवा नज़र उतार, नज़र ना लग जावे।
भक्तों को करने निहाल श्याम बाबा आएंगे
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