कौशल्या रानी अपने लला को दुलरावे
पिंजरे की मैना अब तो सुमर ले हरि नाम।
आ जाओ आ जाओ कीर्तन है आज तुम्हारा शेरावाली आ जाओ।
मन हरि ॐ हरि ॐ गा ले,
नाम जपने की आदत बना ले ।
तेरा घूंघटा उड़ उड़ जाए तूं घूंघट कर ले जोगनिया।
कान्हा धीरे से पकड़ो ये आंचल मेरा
पांव यमुना में मेरा फिसाल जाएगा।
करुणा की ऐसी,नज़र श्याम कर दे, खाली है दामन, हे दातार भर दे।
तुम मेरे हो बाबा मेरे हो, बस मेरे हो बाबा मेरे हो,
म्हारा उज्जैन का महाराजा ने, खम्मा रे खम्मा।
कुण्डा खोल या न खोल खड़कई जावागे,
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