पूजा की थाली सजाई माँ,
तेरी प्यार से ज्योत जलाई मां।
भवन बना वे ऊँची धार माइये,
सोहणा नजारा तेरे भवना दा,
आ गई आ गई,
शेरोवाली मैया आ गई,
आजा मां धीरज छूट न जाये।
देर ना हो जाये कहीं देर न हो जाये,
लहर लहर लहराए चुनरिया मैया की ।
भक्तो के मन भाए, चुनरिया मैया की ।
अज्ज नी किसे ने सोना,
जगराता मेरी माई दा,
सुरता राम भजाँ सुख पावो॥
ऐ भक्तो मेरे मरने के बाद,
इतना कष्ट उठा देना,
मुकद्दर के मालिक,
मुकद्दर बना दे,
दरबार निराला है मेरी झंडेवाली मैया का,
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