शेरावाली का सजा दरबार है, माँ की महिमा जग में अपरम्पार है,
थारां टाबर ल्याया जी, दादीजी ओढ़ो लाल चुनड़ी,
हे जगजननी हे अम्बे माँ, कृपा कर दो जगदम्बे माँ,
सच्चे मन से मैया के, दरबार जाओगे, तभी तो मैया रानी का, दीदार पाओगे।
रात शेरावाली माँ, कमाल कर गई, मेरे घर आई, मालामाल कर गई।
कुटिया मेरी माँ सूनी पड़ी, मैं रस्ता निहारूं तू आ मावड़ी ।।
तीज्यों के सिन्धारे में, दादी ने बुलावांगा,
थाने चूनड़ी माँ टाबरिया उढ़ाणे आया
भजन के बिना तूने,ये जीवन गंवाया,
भज ले क्यूँ न राधे कृष्णा, फेर पछताओगे॥
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