गोपाल मुरलिया वाले,
नंदलाल मुरलिया वाले,
दरबार में सतगुरु के क्या भाग्य पाया है। देखे नहीं गुण अवगुण हमें अपना बनाया है।
हर ग्यारस पे बाबा,
मुझे खाटू आना है,
कृष्ण मुरारी जी,
आंख बसे मन भावे,
थाने बार बार नहीं मिलसी रे,
मिनक जन्म रो चौघड़ीयो।,
बाबा आओ तो,
मनड़े री बात कर ल्यूँ
एक बार आजा दादी,
तुझको निहार ल्यूं,
आईजी जगमग जागी, केसर वाली रे ज्योत, भगतो ने दर्शन देवजो,
हम साँवरे के नौकर मालिक हमारा श्याम है,
प्रेम की डोरी,
कदै ना टूटे,
म्हारा श्याम धनी,
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