ओ बाबा श्याम पलकां थारी खोलो जी,
दादी जी पलका ने उघाड़ो।
झुंझुनू वाली का लाड लड़ाबन आया हां।
चुनर थारे ताई लयाया ये दादी थाने उढास्यां।
ल्याय संदेशों ओ डाकिया म्हारी दादी को
कून सजाई दादी जी थे लागो प्यारी बन्दडी।
मोहे डर लागे रे गोकुल वासी धीरे धीरे हांको थारे रथड़ा ने।
बोल कैसे कन्हैया रिझाए राधे
म्हारी सुरता घुंघट के पट खोल दिखाऊँ तने हरी नगरी।
रंग बरसे नाचे कृष्णा मुरारी रंग बरसे,
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