बाजे रे शंख और नगाड़े अंजनी के घर ललना पधारे,
कोई नहीं जहाँ में धनवान मेरे जैसा,
चौपड़ खेलें भोले बाबा गजब भयो रे,
होते बृज के मोर सखी री हम होते बृज के मोर।
अंजनी के लाल हनुमान बाला जी मेरी नैया लगा दो पार
खाटू से आयो बाबा श्याम, देखो कीर्तन में,
साधो भाई मुर्दा देवे हेला,
मां बनीने आवो प्रभुजी मारे बालक थईने तने मलवु छे।
साथनिया म्हारी रात को,सपनो तो म्हाने यू आयो ।
कितना प्यारा श्रृंगार सजाया, दर्शन करते रहे
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