अब दया करो हे भोलेनाथ
मस्त रहूं तेरी मस्ती में।
आधार हो एक तेरा, आस एक तेरी,
रथ कलकत्तेयों चालिया आज मेरी काली दा
मंगल गाओ री सखी री मेरी आज सगुन भये मेरे घर में।
में कोन्या जानी राम बुढ़ापा बैरी आवेगा
मैया बैठी है भवन में ओढ़े चुनरी
श्री श्याम सलौने का,
श्रृंगार बसंती है दरबार बसंती ह।
मनाओ गणपत जी को आज,
अरे थाली में जगमग होये,
आरती कृष्ण कन्हैया की,
आओ पधारो मेरे आंगन पधारो,
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