क्यों बैठा चुपचाप तू कुछ तो बोल सँवारे
आज तो आनंद भयो म्हारा सतगुरु आया पावणा
रो रो कहती सिया मेरे रामा पिया जल्दी आओ दुष्ट रावण से हमको बचाओ।
हिन्दो घलई दूँ सत्संग बाग में,
सुण सुन रे,म्हारा प्यारा नंदलाला, बागां रो मोरयो बणाय दीजै
तूं घंटा बिता आई चार,हो चार, क्या करने गई थी सत्संग में।
पंछिड़ा भाई कई बैठो तरसायो रे,
झोली भर लो भक्तो, दौलत बरसे भोले के दरबार,
बाप भी छुप के रोता हैं,
छतरी में लगायो टेलीफोन बजरंग बालाजी।
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