आसमाँ को छू कर देखा, तारों की करली सवारी
के भोले इस सावन भी तेरे दरस न होंगे,
क्यू खड़ी खड़ी तू हालै रे गौरा
चाल कसुती चालै।
मैं तो रोवे दूध पिलाये दूंगी
मेरो छोटो सो लंगुरियां
रास रचैया कृष्ण कन्हैया छुप गए हो किस ओर
म्हारो नटवर नन्द किशोर,
चले पईया पईया,
गुरु सरिका देव हमारे मन भावे,
भरयो राम रस कांसो,
रे भंवरा,
तू मत ज्याजे रे प्यासो,
ग्यारस को दिन आयो, बलम मोहे मंदिर तो जाने दे।
बातों को कर लो बंद, कथा ग्यारस की सुन लो जी।
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