मेरी वृन्दावन ससुराले मै कैसे आऊं तेरी नगरी
चंदन चावल बेल की पतिया शिव जी के माथे धरो,
आयो मेलो बाबा को मैं खाटू नगरी जावांगा,
कागज की नैय्या हैं राम के सहारे, चली जा रही हैं किनारे किनारे।
सांवरे से मुलाकात है मुझको रोको ना मेरा यार है
भक्तो के मन को भाय गयो रे
एक छोटो सो ग्वालो
राम रस बरस्यो री,
आज म्हारे आंगन में ।
सांवरे तेरा दर जन्नत की डगर, मुझे खाटू बुलाया तेरा शुक्रिया।
कैसे गिने कोई एहसान तेरे सांसे कम पड़ जाती है।
तुझसे विनती करूँ, पैर तेर पड़ूं, लाज बचा ले।
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