फागुन में उड़े रे गुलाल कहियो नंदरानी से।
अरे जा रे हट नटखट,
ना छू रे मेरा घूँघट।
मैं ना ना करती हार गई,
रंग डार गयो,
रंगीलो मेलो श्याम को आयो
सजी है नगरी खाटू सारी रंगीलो मेलो आयो श्याम को,
मेरी मटकी दिनी फोड़ श्याम ने कंकरिया मारी।
रंग रंगीला बाबा का जब लखी मेला आता है।
आयो फागण को त्यौहार नाचे ठुमक-ठुमक दातार
फागण का मौसम है आया उड़ रहे रंग गुलाल
होली खेल रहे शिवशंकर
गौरा पार्वती के संग
You must be logged in to post a comment.