क्यों पूछते हो श्याम, मुझे क्या पसंद है,
मंदिर में बैठे श्याम गमले में बैठी तुलसा
अब तू ही बता गोपाल,
कुण पार लगावेगो,
बाबा जी नैण रसीला, ज्यूँ अमृत का प्याला जी
झिरमिर झिरमिर रे ओ खाटूवाला म्हे रोवां जी बाबा
आँख फड़ूखे, बोले कागलियो,
म्हारो हरषे छे हिवड़े आज,
होली खेलन श्याम के संग,
चली वृषभान लाली,
खाटू का देव निराला, यो लीले घोड़े वाला।
झीणी झीणी ओढणी में गोरा गोरा गाल
आजा मेरे दिलदार खाले पान रो टुकड़ों
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