बठे समदरियो हिलोरा लेवे म्हारा राम, काई बताऊं गढ़ लंका की।
वृंदावन उपजे पेड़ वृक्ष या की तीन लोक में छाया।
कैसे मनाऊं तोहे अंजनी के लाला,
चैत्र पूर्णिमा के दिन जन्मे अंजनी के घर महाबली।
बाला जी का सूंदर नजारा ,ये तो तीर्थो में तीर्थ न्यारा।
बालाजी मोहे राम मिला दो,
मोर छड़ी लहराई रे,
रसिया ओ सांवरा,
एक मटकी फोड़बा की यही छे सजा,ले चाल रे कानूड़ा मने झूला में झूला।
ओ मेरे ठाकुर जी तेरी मैं दीवानी हो गई
बालाजी म्हाने राम से मिलादो,
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