तेरी मुरलिया ने बनाया दीवाना
राम रस बरस्यो री आज म्हारे आंगन में,
जो मन में प्रेम की ज्योति जला दोगे तो क्या होगा
मेरा तो एक सपना है के बस जाऊ खाटू में,
सासु लडूंगी जरूर चाहे जान चली जाए।
हरि का नाम अमृत है हमें पीना नहीं आता।
मेरे दिल का खिलौना ले गए, नहीं आए संवरिया बेदर्दी
भीलनी की कुटिया में आ गये राम।
प्रेम की डोरी,
कदै ना टूटे,म्हारा श्याम धनी,
श्याम मैं रह ना पाऊँगी।
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