रात के बारह बजे गली में हुल्लड़ मचे
हे गोपाल कृष्ण करू आरती तेरी
माटी को तनड़ो थारो माटी बन जासी रे
वा ही दिन की खबरिया,
करो रे बन्दे,
सोइ रसना, जो हरि-गुन गावै।
मैं थाने सिवरू गजानन देवा,
वचनों रा पालनहारा जी ओ।।
गोविंद हरे गोपाल हरे, जय जय प्रभु दीनदयाल हरे।
बन्ना धीरे चलो ससुराल गलियां।
थारा नंबर देवो नी घनश्याम जी
गयो गयो री सास तेरो राज, जमानो आयो बहुअन को।
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