आओ नंदलाल तरस रहे नैना।आओ गोपाल तरस रहे नैना।
सगोजी री घर वाळी न लेग्यो काळो चोर ।
पहले शिव गणपत को मनाना उनके चरणों में शीश को झुकाना
आये जो ग्यारस तेरे दर पर उसका शुभ मंगल होगा
श्याम रहमत के समंदर में, उतर जाने दे।
हे राधा बल्लभ प्यारे कह दो कि तुम हो हमारे।
चल खाटू तूं चल खाटू।
लारे लारे राधा रुक्मण कंचन वालों रथडो राज।
सगोजी बोले इंगलिश, वहां हिन्दी का क्या काम है
बाग लगाइया पन्ना मारु बाग लगाया,
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